'संसद में आएं तो खौफ लगता है...', महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए PM मोदी ने खोल दी विपक्ष की पोल, कहा- पंचायत में तो आराम से दे देते हो
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष की पोल खोल दी। उन्होंने कहा कि ये लोग पंचायतों में आरक्षण आराम से दे देते हैं, क्योंकि उनमें खुद का पद जाने का कोई डर नहीं लगता।
- प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी
- 2 min read
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष की पोल खोल दी। उन्होंने कहा कि ये लोग पंचायतों में आरक्षण आराम से दे देते हैं, क्योंकि उनमें खुद का पद जाने का कोई डर नहीं लगता।
उन्होंने आगे कहा कि हमारे देश में जब से महिला आरक्षण को लेकर चर्चा हुई और उसके बाद जब-जब चुनाव आया है, महिलाओं को मिलने वाले इस अधिकार का जिस-जिसने विरोध किया है, महिलाओं ने उसे माफ नहीं किया है।
'आज वो वोकल हैं'
प्रधानमंत्री ने कहा, "आज से 25—30 साल पहले, जिन्होंने महिला आरक्षण का विरोध किया वो विरोध राजनीतिक सतह से नीचे नहीं गया था। आज ऐसा समझने की गलती मत करना। पिछले 25-30 साल में ग्रास रूट लेवल पर पंचायती चुनाव व्यवस्थाओं में जीत कर आईं बहनों में एक पॉलिटिकल कॉन्शियसनेस है। पहले वो शांत रहती थीं, समझती थीं लेकिन बोलती नहीं थीं। आज वो वोकल हैं। इसलिए आज जो भी पक्ष विपक्ष होगा, वो लाखों बहनें जो पंचायत में प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं, लोगों के सुख-दुख को गहराई से देखा है, वो आंदोलित हैं।"
उन्होंने आगे कहा कि, 2023 में इस नए सदन में हमने सर्वसम्मति से नारी शक्ति वंदन अधिनियम को स्वीकार किया था। पूरे देश में खुशी का वातावरण बना और उस पर कोई राजनीतिक रंग नहीं लगा, इसलिए ये राजनीतिक मुद्दा नहीं बना। ये अच्छी स्थिति है। अब सवाल ये है कि अब हमें कितने समय तक इसे रोकना होगा?
'ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव या अन्याय नहीं करेगी'
पीएम मोदी ने कहा, मैं आज बड़ी जिम्मेदारी के साथ इस सदन से कहना चाहता हूं कि चाहे दक्षिण हो, उत्तर हो, पूरब हो, पश्चिम हो, छोटे राज्य हों या बड़े राज्य हो... ये निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी भेदभाव या अन्याय नहीं करेगी। भूतकाल में जो सरकार रही, जिनके काल में जो परिसीमन हुआ, उस अनुपात में भी कोई बदलाव नहीं होगा, और वृद्धि भी उसी अनुपात में होगी। अगर गारंटी चाहिए तो मैं गारंटी देता हूं, वादा चाहिए तो वादा देता हूं... क्योंकि अगर नीयत साफ है, तो शब्दों का खेल करने की जरूरत नहीं है।
Published By : Kunal Verma
पब्लिश्ड 16 April 2026 at 16:24 IST