जानिए कहानी 'महाबली' टी-72 टैंक की, हटाने की तैयारी में है इंडियन ऑर्मी लद्दाख में इसी से हुआ हादसा

लद्दाख में ड्रिल के दौरान हादसे में 5 जवान शहीद हो गए। टी-72 टैंक पांच दशकों से भी ज्यादा समय से भारतीय सेना (Indian Army) का सबसे भरोसेमंद साथी रहा है।

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Indian Army T-72 Tank
भारतीय सेना का टी-72 टैंक की प्रतीकात्मक तस्वीर | Image: ADGPI

Explainer What is T-72 Tank: शुक्रवार (28 जून) को लद्दाख के दौलत बेग ओल्डी इलाके में एक बड़ा हादसा (Accident) हो गया जिसमें सेना के 5 जवान शहीद (Martyre) हो गए। दरअसल जवान एक ड्रिल के दौरान टी-72 (T-72 Tank) टैंक जिसे 'महाबली' के नाम से जाना जाता है, पर सवार होकर नदी पार कर रहे थे तभी अचानक से नदी में बाढ़ (Flood) आई और इस हादसे में 5 जवान शहीद हो गए। 'महाबली' पांच दशकों से भी ज्यादा समय से भारतीय सेना (Indian Army) का सबसे भरोसेमंद साथी रहा है।

'महाबली' (Mahabali) के नाम से विख्यात टी-72 टैंक (T-72) को सोवियत रूस ने 1960 के दशक में पहली बार बनाया था। इस टैंक का इस्तेमाल रूसी सेना ने कई कठिन मोर्चों पर किया और उन अभियानों में उसे सफलता भी मिली। इसी समय 1962 में चीन के हमले से शिकस्त खाने के बाद भारत में भी अपडेटेड हथियारों की डिमांड बढ़ी। भारतीय सेना को आधुनिक हथियारों से लैस करने के लिए साल 1970 में ये टैंक भारत ने रूस से खरीदा।

टी-72 टैंक नाम कैसे पड़ा महाबली?

टी-72 टैंक को महाबली नाम से इसलिए बुलाया जाता है क्यों कि इस टैंक का वजन 41 टन है। इस टैंक को ऑपरेट करने के लिए 3 क्रू मेंबर्स के बैठने की जगह बनाई गई है। यह टैंक 2190 एमएम ऊंचा है, तो वहीं इस टैंक की चौड़ाई 3460 एमएम है। यह टैंक 60 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ सकता है। खराब रास्तों पर भी इस टैंक की स्पीड लगभग 40 से 45 किमी प्रतिघंटा होती है।

टी-72 टैंक की खास बातें

महाबली टैंक की कुछ खास बातें हैं जो इसे अन्य टैंकों से अलग करती हैं।

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  • इस टैंक का वजन 41000 किलोग्राम है इतना वजनी टैंक होने के बावजूद ये एक अच्छी स्पीड से दुर्गम रास्तों पर भी चल सकता है।
  • यह टैंक 780 हॉर्स पावर जेनरेट करता है। इस टैंक में 125 मिली मीटर की तोप लगी है, जो दूर से ही दुश्मन पर सही निशाना भेद सकती हैं।
  • इसकी मारक क्षमता 4500 किलोमीटर तक है ये साढ़े चार हजार किमी की दूरी तक तैनात दुश्मन को आसानी से निशाना बना सकता है।
  • इस टैंक में परमाणु हमलों को भी झेलने की क्षमता है इसी वजह से इसे इंडियन ऑर्मी कवच के नाम से भी जाना जाता है।
  • न्यूक्लियर हमलों के अलावा इस टैंक पर बायोलॉजिकल और केमिकल हमलों का असर भी नहीं होता है।  
  • भारतीय सेना में शामिल होने के बाद भारतीय सेना ने इस टैंक से कई लड़ाइयां जीती जिसके बाद से धीरे-धीरे इसका एक और नाम 'अजेय' पड़ गया ।

सेना आखिर क्यों 'महाबली' को हटाने की तैयारी कर रही है?

इतने गुणों से भरे होने के बावजूद भारतीय सेना (Indian Army) अब टी-72 टैंक्स को इंडियन ऑर्मी के बेड़े से हटाने की तैयारी कर रही है।  मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक साल 2030 तक भारतीय सेना 'महाबली' को अपने बेड़े से सेवामुक्त करने की तैयारी कर रही है। इसके पीछे की वजह ये है कि भारतीय सेना इसी साल 57 हजार करोड़ की लागत वाले एक नए प्रोजेक्ट की तैयारी में है इस रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) तैयार करने का प्लान कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट में आने वाले समय की सभी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कॉम्बैट व्हीकल बनाए जाएंगे। 

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Published By:
 Ravindra Singh
पब्लिश्ड