नीट पेपर लीक मामले की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में सीबीआई वकील के न पहुंचने से पहली सुनवाई टल गई है। जज अनु ग्रोवर बलीगा को आरोपी दिनेश और विकास बिवाल की जमानत पर सुनवाई करनी थी।
नीट पेपर लीक मामले की विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में सीबीआई वकील के न पहुंचने से पहली सुनवाई टल गई है। जज अनु ग्रोवर बलीगा को आरोपी दिनेश और विकास बिवाल की जमानत पर सुनवाई करनी थी।
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NEET Paper Leak: नीट-यूजी पेपर लीक मामले के निपटारे के लिए गठित विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई के पहले ही दिन सुनवाई नहीं हो सकी। सोमवार (27 जुलाई) को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की ओर से अदालत में कोई भी सरकारी वकील पेश नहीं हुआ, जिसके चलते मामले की सुनवाई अगले सोमवार (3 अगस्त) तक के लिए टल गई है।
राउज एवेन्यू कोर्ट में इस विशेष फास्ट ट्रैक अदालत की जज अनु ग्रोवर बलीगा को मामले में गिरफ्तार आरोपी दिनेश बिवाल और विकास बिवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करनी थी। सुनवाई के दौरान आरोपियों के वकील एपी सिंह कोर्ट में उपस्थित थे, लेकिन CBI की ओर से कोर्ट में कोई वकील मौजूद नहीं था।
Anti-Paper Leak Bill: सोमवार (27 जुलाई) को लोकसभा में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने एंटी-पेपर लीक बिल 2026 पेश कर दिया है। इसे लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 नाम दिया गया है। हालांकि, सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच बिल पर चर्चा नहीं हो पाई और लोकसभा की कार्यवाही को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया। अब केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी पार्टियों से अपील की है कि वह हंगामा छोड़कर इस महत्वपूर्ण बिल पर चर्चा में भाग लें और इसे पारित कराने में सहयोग करें।
‘…तो इससे गलत संदेश जाएगा’
किरेन रिजिजू ने कहा कि देश भर के छात्रों की चिंताओं को देखते हुए पेपर लीक जैसी समस्याओं से निपटने के लिए लोकसभा में एक अहम बिल पेश किया गया है। हालांकि, कांग्रेस पार्टी और विपक्ष के कुछ सदस्य इस पर चर्चा करने से इनकार कर रहे हैं, इसके जगह वे हंगामा कर रहे हैं। मैं उनसे अपील करता हूं कि वे प्रधानमंत्री द्वारा आज लिए गए अहम फैसले पर विचार करें।
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उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए उपाय घोषित किए गए हैं, एक टास्क फोर्स का गठन किया गया है और परीक्षा प्रणाली में सुधार करने और भविष्य में कोई लीक न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए एक क्रांतिकारी बिल पेश किया गया है। पेपर लीक में शामिल पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए कड़ी और समयबद्ध सजा का प्रावधान किया गया है। अगर इन सभी उपायों के बाद भी चर्चा की अनुमति नहीं दी जाती है, तो इससे गलत संदेश जाएगा।