नेपाल के PM प्रचंड ने खोया विश्वास मत, क्या ओली बनेंगे नए प्रधानमंत्री? ये रहे आंकड़े
पुष्प कमल दहल प्रचंड ने 25 दिसंबर, 2022 में पीएम पद संभाला था। इसके बाद वो 4 बार विश्वास मत का सामना कर चुके हैं, लेकिन इस बार उनकी सरकार गिर गई।
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Nepal Politics: नेपाल में विश्वास मत खोने के बाद पुष्प कमल दहल प्रचंड (Pushpa Kamal Dahal) के नेतृत्व वाली सरकार गिर गई है। प्रचंड ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। पिछले सप्ताह उनकी सरकार से कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-यूनिफाइड मार्क्सवादी लेनिनवादी (Unified Marxist–Leninist) ने अपना समर्थन वापस ले लिया था। देश की 275 सदस्यीय प्रतिनिधि सभा में प्रचंड को 63 वोट मिले, जबकि विश्वासमत प्रस्ताव के विरोध में 194 वोट पड़े।
पुष्प कमल दहल प्रचंड के पीएम पद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली (KP Sharma Oli) के नेतृत्व में नई सरकार का गठन होने का रास्ता साफ हो गया है। प्रचंड को विश्वास मत हासिल करने के लिए कम से कम 138 वोट की जरूरत थी, लेकिन वो इस आंकड़े तक नहीं पहुंच पाए। प्रतिनिधि सभा के 275 में से 258 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा लिया था, जबकि एक सदस्य वोटिंग में शामिल नहीं हुए थे। नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी-माओइस्ट सेंटर (CPN-MC) के अध्यक्ष पुष्प कमल ने 25 दिसंबर, 2022 में पीएम पद संभाला था। इसके बाद वो 4 बार विश्वास मत का सामना कर चुके हैं, लेकिन इस बार उनकी सरकार गिर गई।
नेपाली कांग्रेस के पास 89 सीट
नेपाल की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष देव राज घिमिरे ने प्रचंड के विश्वासमत प्रस्ताव को संविधान के अनुच्छेद 100 खंड 2 के अनुसार मतदान के लिए रखा था। मतदान पूरा होने के बाद उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री प्रचंड विश्वास मत हासिल करने में असफल रहे। अध्यक्ष घिमिरे अब नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल को सूचित करेंगे, जो संविधान के अनुच्छेद 76 खंड 2 के अनुसार दो या दो से अधिक राजनीतिक दलों को नई सरकार के लिए दावा पेश करने के लिए आमंत्रित करेंगे।
पूर्व प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सीपीएन-यूएमएल ने सदन में सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस के साथ सत्ता-साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद पिछले सप्ताह प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। नेपाली कांग्रेस के पास प्रतिनिधि सभा में 89 सीट हैं, जबकि सीपीएन-यूएमएल के पास 78 सीट हैं। इस तरह दोनों पार्टी के सदस्यों की संख्या 167 हो गई है, जो निचले सदन में बहुमत के लिए जरूर 138 से कहीं अधिक है।
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साझा होगा पीएम पद
नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा पहले ही अगले प्रधानमंत्री के रूप में ओली का समर्थन कर चुके हैं। देउबा और ओली ने प्रचंड के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से हटाने के बाद नई गठबंधन सरकार बनाने के लिए सोमवार को सात सूत्री समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के अनुसार, ओली और देउबा चुनाव से पहले बचे हुए समय में बारी-बारी से प्रधानमंत्री पद साझा करेंगे। पहले चरण में ओली डेढ़ साल के लिए प्रधानमंत्री बनेंगे और उसके बाद देउबा प्रधानमंत्री रहेंगे।
प्रचंड की पार्टी के पास प्रतिनिधि सभा में 32 सीट हैं। वह सीपीएन-यूएमएल के समर्थन से 25 दिसंबर, 2022 को तीसरी बार प्रधानमंत्री निर्वाचित हुए थे। प्रचंड को नेपाल के संविधान के अनुच्छेद 76 खंड 2 के अनुसार प्रधानमंत्री चुना गया था, जिसमें दो या दो से अधिक दलों के समर्थन से प्रधानमंत्री चुनने का प्रावधान है। शुक्रवार दोपहर प्रतिनिधि सभा का सत्र शुरू होते ही प्रचंड ने साझा सिद्धांतों के बजाय डर के चलते गठबंधन बनाने को लेकर नेपाली कांग्रेस और सीपीएन-यूएमएल की तीखी आलोचना की और उनपर देश को पीछे की ओर धकेलने का आरोप लगाया।
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(भाषा इनपुट के साथ रिपब्लिक भारत डेस्क)
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